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जीना इसी का नाम है: इस तरह बढ़ेगा उनका आत्मविश्वास….

मनुष्य जन्म पाकर भी मनुष्य यदि अशिक्षित रह गया तो वह धरती पर भार के समान है। वे तो मात्र मनुष्य के रूप में पशु समान विचरण कर रहे हैं, इसलिए बाल्यावस्था से ही माता-पिता को बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। शिक्षा के प्रति अभिरूचि उत्पन्न करने के लिये विशेश प्रयास अपेक्षित हैं। माता-पिता के द्वारा बच्चे को शिक्षा का महत्व बताया जाये, मेधावी छात्रों एवं महापुरूषों के दृष्टांत उनके समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। उन्हें प्रेरणा स्रोत बनाकर बच्चे अपने जीवन को श्रेष्ठ एवं उन्नत किस प्रकार बनायें, ऐसा शिक्षा के प्रति उनका आकर्षण स्वत: उत्पन्न होने लगता है। अच्छे कार्य किये जाने पर, परीक्षा में अच्छे अंक लाने पर उन्हें पुरस्कृत किया जाये। इससे उनका उत्साहवर्धन होगा तथा आत्मविश्वास बढेगा, बच्चों के द्वारा कोई त्रुटि हो जाये तो डांट-डपट और उनके साथ मारपीट यदि की जायेगी तो उनका नैसर्गिक विकास रूक जायेगा। यह भी सम्भव है कि वे गलत मार्ग पर चले जायें। इसलिए बच्चों को प्यार से समझाया जाये। अधिक गलती हो जाने पर हल्की सी डपट प्रभावी रहेगी, परन्तु यह ध्यान रखें कि हर समय की प्रताडना से बच्चों के भीतर हीन भावना आ जायेगी, जो उसे जीवन भर परेशान करती रहेगी।

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