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छहररे बदन वाले लोगों के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड अब मोटापे की भूमि

 

पहाड़ियों पर जीवन शरीर को एक्टिव रखता है, लेकिन इसके बावजूद उत्तराखंड में लोगों का वजन जरूरत से अधिक हो गया है। वास्तव में देश के नौ राज्यों में हाल ही में किए गए एक अध्ययन में इस दुर्गम राज्य में 18 से 59 वर्ष की आयु के लोगों में मोटापे का सबसे अधिक प्रतिशत दर्ज किया गया। वार्षिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के मुताबिक, सभी आयु समूहों में जरूरत से अधिक वजन वाले लोगों की आबादी का प्रतिशत उत्तराखंड में सबसे अधिक 21.6 प्रतिशत है। उत्तराखंड के 284 जिलों में जरूरत से अधिक वजनी लोगों की सबसे ज्यादा मौजूदगी देहरादून में (28.1 प्रतिशत) पाई गई।

मैक्स हॉस्पिटल के वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ डॉक्टर दिनेश सिंह ने कहा, युवा आबादी में अत्यधिक वजनी लोगों की इतनी अधिक मौजूदगी इस पहाड़ी राज्य के लिए खतरे की घंटी है क्योंकि यह राज्य पारंपरिक रूप से पतले लोगों के लिए जाना

जाता रहा है। बेकार जीवनशैली, जंक फूड, चीनी, नमक, तेल का अत्यधिक सेवन और न के बराबर व्यायाम से मोटापा आता है जोकि अपने आप में महामारी है। यह ह्रदय रोगों, मधुमेह, ओस्टियोअर्थराइटिस आदि का सबसे आम कारण है। बचपन में मोटापा भी सांस संबंधी तकलीफें पैदा करता है और इससे हड्डी में टूटफूट, हाइपरटेंशन और मनोवैज्ञानिक प्रभाव का जोखिम बढ़ता है। हमें इस आबादी को संतुलित आहार अपनाकर, चीनी, नमक और तेल का सेवन घटाकर एवं नियमित व्यायाम के जरिए एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के प्रति संवेदनशील बनाने की जरूरत है।

पोषण के स्तर में गिरावट और मोटापा एवं जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों में तेज बढ़ोतरी को देखते हुए केंद्र सरकार और सरकारी एजेंसियों ने रोकथाम और जागरूकता को लेकर कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। फूड फोर्टिफिकेशन, खाद्य सुरक्षा, चीनी, नमक और तेल के सेवन में कमी लाना और जीवन के प्रथम 1000 दिनों में पोषण जैसे मुद्दों को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) का ईट राइट इंडिया मूवमेंट, इसी तरह की एक पहल

है। एक बड़ी आबादी तक ईट राइट इंडिया मूवमेंट का प्रचार प्रसार करने के प्रयास के तहत स्वस्थ भारत यात्रा शुरू की गई। इसमें करीब 750 साइकिल सवार दिल्ली रवाना हुए हैं। यह यात्रा 1930 के दांडी मार्च से प्रेरणा लेकर शुरू की गई है।

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