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क्या होता है जब व्यक्ति को अहंकार हो जाता है…

अहंकार:विनम्रता व्यक्ति का वह सदगुण है, जिसके होने पर व्यक्ति के भीतर अन्य सदगुण स्वत: ही विकसित होने लगते हैं, किन्तु जब व्यक्ति को अहंकार हो जाता है, तो वह अपने अहंकार की रक्षा के लिये हर प्रकार के दुर्गुणों को अपनाने से नहीं चूकता।

अहंकारी व्यक्ति में दुर्गुण स्वाभावत: होते हैं और जैसे-जैसे उसके अहंकार में वृद्धि होती जाती है, दुर्गुण उससे भी अधिक वेग से उसमें पुष्ट होते जाते हैं। अहंकार व्यक्ति को कठोर और संवेदनहीन बना देता है, जबकि विनम्रता उसे नम्र, ग्रहणशील तथा संवेदनशील बनाती है।

इसी कारण संत, मनीषी, विद्वान हमें अहंकार से दूर रहने का उपदेश करते हैं। यदि जीवन में विकास करना है, अपनी पात्रता को विकसित करना है तो तिनके की भांति विनम्र बनो। विनम्रता जब व्यक्तित्व में घुल मिल जाती है, तब वह शालीनता बन जाती है।

शालीनता बिना मूल्य के मिलती है, परन्तु उससे सब कुछ खरीदा जा सकता है। ऐसे व्यक्ति के लिये कोई भी पराया नहीं होता, सब अपने होते हैं और अपने बनते चले जाते हैं।

जीवन में यदि आगे बढना है, व्यक्तित्व को संवारना है, सम्मान पाना है, विकास करना है तो सबसे पहले विनम्र और शालीन बनो।

 

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