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PC: The Hindu

Assembly Elections 2018: कौन बनेगा CM? फैसला करेंगे राहुल गांधी!

राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में सरकार बनाने का आंकड़ा हासिल करने के बाद बुधवार को कांग्रेस में इन राज्यों के लिए मुख्यमंत्री चुनने की कवायद शुरू हुई। मध्यप्रदेश और राजस्थान में जहां कांग्रेस अपने दम पर बहुमत से चूक गई है। ऐसे में इन दोनों राज्यों में किसी विवाद से बचने के लिए कांग्रेस फूंक-फूंक कर कदम उठा रही है। वहीं, छत्तीसगढ़ में कोई संभावित चेहरा नहीं उभरने की स्थिति में पार्टी नवनिर्वाचित विधायकों और कार्यकर्ताओं का मन टटोल रही है। बुधवार को तीनों राज्यों में नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक हुई। इसके बाद विधायकों ने मुख्यमंत्री चुनने का अधिकार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को दे दिया। उम्मीद जताई जा रही है कि कांग्रेस गुरुवार को तीनों राज्यों के मुख्यमंत्री का नाम ऐलान कर देगी।

छत्तीसगढ़

तीन हिंदी भाषी राज्यों में छत्तीसगढ़ ही अकेला राज्य है, जहां कांग्रेस को न केवल बंपर जीत मिली है, बल्कि दो तिहाई से अधिक बहुमत मिला है। ऐसे में यहां समर्थन जुटाने और पार्टियों को साथ करने की बजाय मुख्यमंत्री कौन बनेगा इसपर दिनभर चर्चा होती रही। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे पहुंचे। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री की रेस में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल और वरिष्ठ नेता व सांसद तमरध्वज साहू को सबसे आगे माना जा रहा है। टीएस सिंह देव को भी मुख्यमंत्री पद का दावेदार माना जा रहा है।

मध्यप्रदेश: आलाकमान पर छोड़ा फैसला

राज्य में पार्टी बहुमत से मात्र दो सीटें दूर है। ऐसे में सबसे पहले बहुमत जुटाने की कवायद शुरू हुई। दोपहर तक बसपा प्रमुख मायावती ने और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कांग्रेस का साथ देने का ऐलान कर दिया। नवनिर्वाचित विधानसभा में बसपा के दो और सपा का एक सदस्य चुना गया है। दोनों दलों से समर्थन की घोषणा के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्विजय सिंह, अरुण यादव और विवेक तन्खा ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से राजभवन में मुलाकात की और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाने का दावा पेश किया। इसके बाद कमलनाथ के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने कहा कि पार्टी को 230 सदस्यीय विधानसभा में 121 विधायकों का समर्थन हासिल है। इसके बाद नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक हुई और आम सहमति से मुख्यमंत्री का फैसला आलाकमान को सौंप दिया गया। 

राजस्थान 

कांग्रेस बहुमत के जादुई आंकड़े से महज एक पायदान दूर थी। ऐसे में बसपा प्रमुख मायावती का बेमन से ही सही अपने छह विधायकों का समर्थन देने का ऐलान करना कांग्रेस के लिए राहत लेकर आया। हालांकि, कांग्रेस की नजर 13 निर्दलीयों पर भी हैं, जिनमें से कई उसके ही बागी हैं, जिन्होंने टिकट नहीं मिलने पर अकेले मैदान में ताल ठोका। राष्ट्रीय लोकदल का एकमात्र विधायक भी बुधवार सुबह कांग्रेस नेता और मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार अशोक गहलोत से उनके आवास पर मिलने पहुंचे। वहीं बुधवार शाम को हुई विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री पद का फैसला केंद्रीय नेतृत्व पर छोड़ दिया गया।

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