Monday, September 28, 2026
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रणबीर कपूर की रामायण के पहले राम भक्ति में मग्न हुई एक्ट्रेस और सिंगर सुचित्रा कृष्णमूर्ति ! रिलीज़ हुआ सुचित्रा कृष्णमूर्ति और राजू सिंह का ‘हे राम’ !

दीवाली के पवन अवसर पर नितेश तिवारी निर्देशित रणबीर कपूर स्टारर महागाथा रामायण रिलीस होने के लिए तैयार हैं लेकिन उसके पहले एक्ट्रेस सुचित्रा कृष्णमूर्ति लेकर आई हैं एक खूबसूरत पेशकश ‘हे राम’

​गीतकार कुमार के रूहानी बोलों से सजा ‘हे राम’, दोस्ती के एक बेहद निजी एहसास को करुणा, संबल, उम्मीद और इंसानियत का संदेश बनाता है।​जो गीत कभी किसी एक व्यक्ति को सुकून देने के लिए रचा गया था, वह अब पूरी दुनिया के श्रोताओं तक पहुँचने के लिए तैयार है। ​

सुचित्रा कृष्णमूर्ति और राजू सिंह का भजन ‘हे राम’ 27 सितंबर को वर्ल्ड हार्ट डे (विश्व हृदय दिवस) से ठीक पहले रिलीज़ हुआ।

गीतकार कुमार के लिखे मर्मस्पर्शी बोलों से सजा यह गीत मूल रूप से सुचित्रा और राजू के एक साझे मित्र के लिए रचा और गाया गया था, जो किसी व्यक्तिगत त्रासदी से गुज़र रहे थे।
​अनिश्चितता और गहरी मानसिक उथल-पुथल के उस दौर में, दोनों कलाकार अपने दोस्त को प्यार, सांत्वना और सुकून देना चाहते थे। जब शब्द कम पड़ने लगे, तो उन्होंने संगीत का सहारा लिया।
​दोस्ती का वही व्यक्तिगत भाव आगे चलकर ‘हे राम’ बना।

​”हम किसी का दर्द तो नहीं छीन सकते। लेकिन एक संगीतकार के रूप में, हम किसी गीत में अपना पूरा दिल उड़ेल सकते हैं और उम्मीद कर सकते हैं कि यह उन लोगों तक पहुँचे जिन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।”
— सुचित्रा कृष्णमूर्ति

​पूरी दुनिया तक पहुँचने से पहले, ‘हे राम’ एक पवित्र दोस्ती की अमानत था। इसका उद्देश्य बेहद निजी और मानवीय था—एक मित्र के परेशान दिल को ढांढस बंधाना और उसे यह अहसास कराना कि डर और अनिश्चितता के इस सफर में वह अकेला नहीं है।

​लेकिन जैसे ही यह रचना कुछ और लोगों तक पहुँची, एक अप्रत्याशित मोड़ आया। लोग इसे बार-बार सुनने की गुज़ारिश करने लगे।

​श्रोताओं को इस गीत की कोमलता में अपनी ही ज़िंदगी, भावनाओं और रिश्तों की झलक दिखाई दी। जो रचना सिर्फ एक इंसान को सांत्वना देने के लिए शुरू हुई थी, वह उन परिस्थितियों से बहुत आगे निकलकर कई दिलों को छूने लगी।

​लोगों की इसी प्रतिक्रिया ने सुचित्रा कृष्णमूर्ति और राजू सिंह को यह अहसास कराया कि जो गीत एक दिल को सुकून देने के लिए बना था, वह शायद कई और दिलों को भी राहत पहुँचा सकता है।

​”हमने इसे एक दोस्त के लिए बनाया था, यह सोचे बिना कि यह कितनी दूर तक जाएगा। लोगों के प्यार ने हमें यह अहसास कराया कि एक दिल के लिए बना गीत करोड़ों दिलों में अपना घर बना सकता है।”

— राजू सिंह
​’हे राम’ के केंद्र में गीतकार कुमार के लिखे शब्द हैं, जो सांत्वना की तड़प, प्रार्थना में छिपी ताकत और उस उम्मीद को आवाज़ देते हैं कि हमारा कोई प्रिय व्यक्ति ज़िंदगी के सबसे कठिन मोड़ों पर भी हमारे साथ रहे।
​”दिल की भावनाएं किसी धर्म या सीमा को नहीं मानतीं। जब हमारा कोई अपना तकलीफ में होता है, तो हमारी प्रार्थनाएं एक ही जगह से निकलती हैं।”

— कुमार
​इंसानियत और जुड़ाव का यही भाव ‘हे राम’ को ढालता है और इसे सहृदयता का एक राष्ट्रगान बनाने की प्रेरणा देता है।

​हालाँकि इसका शीर्षक ईश्वर से प्रार्थना करता है, लेकिन इस गीत की भावनात्मक भाषा धार्मिक दायरों से परे है। इसका विस्तृत संदेश करुणा, आपसी जुड़ाव और उस मानवीय संवेदना के बारे में है जो किसी अपने को दर्द में देखकर उसकी मदद के लिए हाथ बढ़ाती है।

​इस लिहाज़ से, ‘हे राम’ जितना सेहत और संबल के बारे में है, उतना ही यह सच्ची दोस्ती के बारे में भी है।

​विश्व हृदय दिवस से ठीक पहले 27 सितंबर को इसका रिलीज़ होना इस गीत को एक और गहरा अर्थ देता है—उस निजी कहानी को बदले बिना जहाँ से यह जन्मा था, बल्कि इसके सहृदयता, उम्मीद और मानवीय जुड़ाव के संदेश को और दूर तक पहुँचने का जरिया बनकर।

​इसके मूल में आज भी वही सादगी भरा कदम है जिससे सब शुरू हुआ था: दो लोगों का संगीत के ज़रिए अपने किसी प्यारे इंसान तक सुकून पहुँचाना।
​अब वही कोशिश कई और दिलों तक पहुँचने जा रही है—इस उम्मीद के साथ कि शायद कहीं कोई ‘हे राम’ सुने और खुद को अकेला न समझे, बल्कि यह महसूस करे कि कोई है जो उसकी भावना को समझता है।

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