एक अनोखा मॉडल, जो लोगों को ठीक होने, दोबारा आत्मविश्वास पाने और सामान्य जीवन में लौटने में मदद करता है
गुरुग्राम: मार्गा माइंड केयर ने अपना इंटीग्रेटिव डे केयर प्रोग्राम शुरू किया है। यह मानसिक स्वास्थ्य देखभाल का एक नया मॉडल है, जो मरीजों को लंबे समय तक ठीक होने में मदद करता है। आज के समय में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरतें बढ़ रही हैं, लेकिन लंबे समय तक मिलने वाली सहायता अभी भी सीमित है। ऐसे में यह प्रोग्राम मरीजों को नियमित सहयोग, सही दिशा और रोज़मर्रा की जिंदगी में वापस लौटने का बेहतर रास्ता देता है।
आज की मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में एक बड़ी चुनौती यह है कि मरीज के गंभीर लक्षण तो संभाल लिए जाते हैं, लेकिन उसके बाद उसे पूरी तरह सामान्य जीवन में लौटने में पर्याप्त मदद नहीं मिलती। मार्गा माइंड केयर इस कमी को अपने इंटीग्रेटिव डे केयर प्रोग्राम के जरिए दूर करने की कोशिश कर रहा है। यह एक व्यवस्थित उपचार प्रणाली है, जो सुरक्षित माहौल में इलाज और सहयोग देती है। इसमें मार्गा माइंड केयर की टीम द्वारा विकसित कॉग्निटिव-मोटर-सेंसरी यानी CMS इंटीग्रेशन मॉडल भी शामिल है।
नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे 2015–16 के अनुसार, भारत में 10.6% वयस्क मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। जीवनभर में ऐसे मामलों की संख्या 13.7% तक हो सकती है। हाल की स्टडीज़ बताती हैं कि भारत की लगभग 15% वयस्क आबादी को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी क्लिनिकल सहायता की जरूरत हो सकती है। फिर भी इलाज की कमी 70% से 92% तक है। WHO ने भी कहा है कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भारत को 2012 से 2030 के बीच ₹9.62 लाख करोड़ का आर्थिक नुकसान हो सकता है। यह बताता है कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए मजबूत और लंबे समय तक चलने वाली देखभाल की बहुत जरूरत है।
यह प्रोग्राम ऐसा माहौल देता है, जहां मरीज सिर्फ मानसिक रूप से स्थिर नहीं होते, बल्कि उनका आत्मविश्वास, खुद को समझने की क्षमता, लोगों से जुड़ने की क्षमता और सामान्य जीवन में लौटने की तैयारी भी बेहतर होती है।
इस प्रोग्राम पर बात करते हुए डॉ. ज्योति नीरजा, फाउंडर और एमडी, मार्गा माइंड केयर ने कहा, “हमारा इंटीग्रेटिव डे केयर प्रोग्राम एक व्यवस्थित, संवेदनशील और व्यक्तिगत मानसिक स्वास्थ्य सेवा के रूप में बनाया गया है। यह लोगों को बेहतर और संपूर्ण तरीके से रिकवरी में मदद करता है। थेरेपी, रोज़मर्रा की दिनचर्या, भावनाओं को संभालने की क्षमता और सामाजिक जुड़ाव को साथ लाकर यह प्रोग्राम मरीजों को आत्मविश्वास फिर से पाने, स्थिरता लाने और अपने दैनिक जीवन में आगे बढ़ने में मदद करता है।”
डॉ. ज्योति कपूर, सीनियर कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट, मार्गा माइंड केयर ने कहा, “इस प्रोग्राम की खास बात यह है कि इसमें व्यवस्थित थेरेपी गतिविधियों के साथ आराम और पुनर्संतुलन के लिए भी समय दिया जाता है। इस प्रोग्राम के जरिए मरीजों के परिवारों ने बताया है कि उन्हें मरीज की स्थिति को बेहतर समझने, बातचीत सुधारने, रिकवरी प्रक्रिया पर भरोसा बढ़ाने और देखभाल के बोझ को कम करने में मदद मिली है।”
यह प्रोग्राम मनोचिकित्सकों और क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट की देखरेख में चलाया जाता है। इसे केस मैनेजर्स, म्यूजिक, योग, एक्सप्रेसिव आर्ट थेरेपी फैसिलिटेटर्स और विशेष नर्सिंग स्टाफ की टीम मिलकर चलाती है। नियमित निगरानी और समीक्षा के जरिए हर मरीज की जरूरत के अनुसार सहायता में बदलाव किया जा सकता है।
डॉ. अभिषेक हरिहरन कंदलुरी, को-फाउंडर, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीबीओ, मार्गा माइंड केयर ने कहा, “मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को सामान्य इलाज से आगे बढ़कर रिकवरी के लिए अधिक व्यवस्थित रास्ते बनाने की जरूरत है। इसमें मरीजों और देखभाल करने वालों की जरूरतों और पसंद को भी शामिल करना जरूरी है। हमारा इंटीग्रेटिव डे केयर प्रोग्राम इसी सोच के साथ बनाया गया है। यह मरीजों को संपूर्ण, व्यक्तिगत और लगातार मिलने वाली संवेदनशील सहायता देता है।”
मार्गा माइंड केयर का इंटीग्रेटिव डे केयर प्रोग्राम मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में एक बड़ा बदलाव दिखाता है। यह सिर्फ एक बार के इलाज पर आधारित नहीं है, बल्कि लगातार चलने वाली रिकवरी पर ध्यान देता है। यह प्रोग्राम मिल्यू थेरेपी और कॉग्निटिव-मोटर-सेंसरी इंटीग्रेशन को मिलाकर एक ऐसा उपचार माहौल बनाता है, जो मरीजों को अस्पताल के बाहर भी वास्तविक जीवन में बेहतर ढंग से काम करने में मदद करता है। यह आधुनिक मनोचिकित्सा के एक महत्वपूर्ण सिद्धांत को मजबूत करता है कि स्थायी रिकवरी अकेले नहीं होती, बल्कि निरंतर देखभाल, सही संरचना और अर्थपूर्ण जुड़ाव से होती है।


